1. जहाँ पहुँचा न जा सके - अगम, अगम्य
2. जिसे बहुत कम ज्ञान हो, थोड़ा जानने वाला - अल्पज्ञ
3. मास में एक बार आने वाला - मासिक
4. जिसके कोई संतान न हो - निस्संतान
5. जो कभी न मरे - अमर
6. जिसका आचरण अच्छा न हो - दुराचारी
7. पंद्रह दिन में एक बार होने वाला - पाक्षिक
8. अच्छे चरित्र वाला - सच्चरित्र
9. आज्ञा का पालन करने वाला - आज्ञाकारी
10. रोगी की चिकित्सा करने वाला - चिकित्सक
11. सत्य बोलने वाला - सत्यवादी
12. दूसरों पर उपकार करने वाला - उपकारी
13. जिसे कभी बुढ़ापा न आये - अजर
14. दया करने वाला - दयालु
15. जिसका आकार न हो - निराकार
16. जो आँखों के सामने हो - प्रत्यक्ष
17. जिसे देखकर डर (भय) लगे - डरावना, भयानक
18. जो स्थिर रहे - स्थावर
19. ज्ञान देने वाली - ज्ञानदा
20. भूत-वर्तमान-भविष्य को देखने (जानने) वाले - त्रिकालदर्शी
21. जानने की इच्छा रखने वाला - जिज्ञासु
22. जिसे क्षमा न किया जा सके - अक्षम्य
23. जिसका कोई मूल्य न हो - अमूल्य
24. जो वन में घूमता हो - वनचर
25. जो इस लोक से बाहर की बात हो - अलौकिक
26. जो इस लोक की बात हो - लौकिक
27. जिसके नीचे रेखा हो - रेखांकित
28. जिसका संबंध पश्चिम से हो - पाश्चात्य
29. जो स्थिर रहे - स्थावर
30. दुखांत नाटक - त्रासदी
31. जो क्षमा करने के योग्य हो - क्षम्य
32. हिंसा करने वाला - हिंसक
33. हित चाहने वाला - हितैषी
34. हाथ से लिखा हुआ - हस्तलिखित
35. सब कुछ जानने वाला - सर्वज्ञ
36. जो स्वयं पैदा हुआ हो - स्वयंभू
37. जो शरण में आया हो - शरणागत
38. जिसका वर्णन न किया जा सके - वर्णनातीत
39. फल-फूल खाने वाला - शाकाहारी
40. जिसकी पत्नी मर गई हो - विधुर
41. जिसका पति मर गया हो - विधवा
42. सौतेली माँ - विमाता
43. व्याकरण जाननेवाला - वैयाकरण
44. रचना करने वाला - रचयिता
45. खून से रँगा हुआ - रक्तरंजित
46. अत्यंत सुन्दर स्त्री - रूपसी
47. कीर्तिमान पुरुष - यशस्वी
48. कम खर्च करने वाला - मितव्ययी
49. मछली की तरह आँखों वाली - मीनाक्षी
50. मयूर की तरह आँखों वाली - मयूराक्षी
51. बच्चों के लिए काम की वस्तु - बालोपयोगी
52. जिसकी बहुत अधिक चर्चा हो - बहुचर्चित
53. जिस स्त्री के कभी संतान न हुई हो - वंध्या (बाँझ)
54. फेन से भरा हुआ - फेनिल
55. प्रिय बोलने वाली स्त्री - प्रियंवदा
56. जिसकी उपमा न हो - निरुपम
57. जो थोड़ी देर पहले पैदा हुआ हो - नवजात
58. जिसका कोई आधार न हो - निराधार
59. नगर में वास करने वाला - नागरिक
60. रात में घूमने वाला - निशाचर
61. ईश्वर पर विश्वास न रखने वाला - नास्तिक
62. मांस न खाने वाला - निरामिष
63. बिलकुल बरबाद हो गया हो - ध्वस्त
64. जिसकी धर्म में निष्ठा हो - धर्मनिष्ठ
65. देखने योग्य - दर्शनीय
66. बहुत तेज चलने वाला - द्रुतगामी
67. जो किसी पक्ष में न हो - तटस्थ
68. तत्त्त्तव को जानने वाला - तत्त्त्तवज्ञ
69. तप करने वाला - तपस्वी
70. जो जन्म से अंधा हो - जन्मांध
71. जिसने इंद्रियों को जीत लिया हो - जितेंद्रिय
72. चिंता में डूबा हुआ - चिंतित
73. जो बहुत समय कर ठहरे - चिरस्थायी
74. जिसकी चार भुजाएँ हों - चतुर्भुज
75. हाथ में चक्र धारण करनेवाला - चक्रपाणि
76. जिससे घृणा की जाए - घृणित
77. जिसे गुप्त रखा जाए - गोपनीय
78. गणित का ज्ञाता - गणितज्ञ
79. आकाश को चूमने वाला - गगनचुंबी
80. जो टुकड़े-टुकड़े हो गया हो - खंडित
81. आकाश में उड़ने वाला - नभचर
82. तेज बुद्धिवाला - कुशाग्रबुद्धि
83. कल्पना से परे हो - कल्पनातीत
84. जो उपकार मानता है - कृतज्ञ
85. किसी की हँसी उड़ाना - उपहास
86. ऊपर कहा हुआ - उपर्युक्त
87. ऊपर लिखा गया - उपरिलिखित
88. जिस पर उपकार किया गया हो - उपकृत
89. इतिहास का ज्ञाता - इतिहासज्ञ
90. आलोचना करने वाला - आलोचक
91. ईश्वर में आस्था रखने वाला - आस्तिक
92. बिना वेतन का - अवैतनिक
93. जो कहा न जा सके - अकथनीय
94. जो गिना न जा सके - अगणित
95. जिसका कोई शत्रु ही न जन्मा हो - अजातशत्रु
96. जिसके समान कोई दूसरा न हो - अद्वितीय
97. जो परिचित न हो - अपरिचित
98. जिसकी कोई उपमा न हो - अनुपम
[Hindi] अनेक शब्दों के लिए एक शब्द।
[Hindi] पर्यायवाची शब्द (समानार्थी शब्द) ।
हिंदी पर्यायवाची शब्द
अ
अग्नि - आग, अनल, पावक, दहन, वह्नि, कृशानु।
अपमान - अनादर, अवज्ञा, अवहेलना, अवमान, तिरस्कार।
अलंकार - आभूषण, भूषण, विभूषण, गहना, जेवर।
अहंकार- दंभ, गर्व, अभिमान, दर्प, मद, घमंड, मान।
अमृत- सुधा, अमिय, पीयूष, सोम, मधु, अमी।
असुर- दैत्य, दानव, राक्षस, निशाचर, रजनीचर, दनुज, रात्रिचर, तमचर।
अतिथि- मेहमान, अभ्यागत, आगन्तुक, पाहूना।
अनुपम- अपूर्व, अतुल, अनोखा, अदभुत, अनन्य।
अर्थ- धन्, द्रव्य, मुद्रा, दौलत, वित्त, पैसा।
अश्व- हय, तुरंग, घोड़ा, घोटक, हरि, बाजि, सैन्धव।
अंधकार- तम, तिमिर, तमिस्र, अँधेरा, तमस, अंधियारा।
आ
आम- रसाल, आम्र, सौरभ, मादक, अमृतफल, सहुकार।
आग- अग्नि, अनल, हुतासन, पावक, दहन, ज्वलन, धूमकेतु, कृशानु, वहनि, शिखी, वह्नि।
आँख- लोचन, नयन, नेत्र, चक्षु, दृग, विलोचन, दृष्टि, अक्षि।
आकाश- नभ, गगन, अम्बर, व्योम, अनन्त, आसमान, अंतरिक्ष, शून्य, अर्श।
आनंद- हर्ष, सुख, आमोद, मोद, प्रमोद, उल्लास।
आश्रम- कुटी, विहार, मठ, संघ, अखाडा।
आंसू- नेत्रजल, नयनजल, चक्षुजल, अश्रु।
आत्मा- जीव, देव, चैतन्य, चेतनतत्तव, अंतःकरण।
इ
इच्छा- अभिलाषा, अभिप्राय, चाह, कामना, लालसा, मनोरथ, आकांक्षा, अभीष्ट।
इन्द्र- सुरेश, सुरेन्द्र, देवेन्द्र, सुरपति, शक्र, पुरंदर, देवराज, महेन्द्र, मधवा, शचीपति, मेघवाहन, पुरुहूत, यासव।
इन्द्राणि - इन्द्रवधू, मधवानी, शची, शतावरी, पोलोमी।
ई
ईश्वर- परमात्मा, प्रभु, ईश, जगदीश, भगवान, परमेश्वर, जगदीश्वर, विधाता।
उ
उपवन - बाग़, बगीचा, उद्यान, वाटिका, गुलशन।
उक्ति - कथन, वचन, सूक्ति।
उग्र - प्रचण्ड, उत्कट, तेज, महादेव, तीव्र, विकट।
उचित - ठीक, मुनासिब, वाज़िब, समुचित, युक्तिसंगत, न्यायसंगत, तर्कसंगत, योग्य।
उच्छृंखल - उद्दंड, अक्खड़, आवारा, अंडबंड, निरकुंश, मनमर्जी, स्वेच्छाचारी।
उजड्ड - अशिष्ट, असभ्य, गँवार, जंगली, देहाती, उद्दंड, निरकुंश।
उजला - उज्ज्वल, श्वेत, सफ़ेद, धवल।
उजाड - जंगल, बियावान, वन।
उजाला - प्रकाश, रोशनी, चाँदनी।
उत्कर्ष- समृद्धि, उन्नति, प्रगति, प्रशंसा, बढ़ती, उठान।
उत्कृष्ट - उत्तम, उन्नत, श्रेष्ठ, अच्छा, बढ़िया, उम्दा।
उत्कोच - घूस, रिश्वत।
उत्पति - उद्गम, पैदाइश, जन्म, उद्भव, सृष्टि, आविर्भाव, उदय।
उद्धार - मुक्ति, छुटकारा, निस्तार, रिहाई।
उपाय - युक्ति, साधन, तरकीब, तदबीर, यत्न, प्रयत्न।
ऊ
ऊधम - उपद्रव, उत्पात, धूम, हुल्लड़, हुड़दंग, धमाचौकड़ी।
ए
ऐक्य - एकत्व, एका, एकता, मेल।
ऐश्वर्य - समृद्धि, विभूति।
ओ
ओज - तेज, शक्ति, बल, वीर्य।
ओंठ- ओष्ठ, अधर, होठ।
औ
औचक - अचानक, यकायक, सहसा।
औरत - स्त्री, जोरू, घरनी, घरवाली।
ऋ
ऋषि - मुनि, साघु, यति, संन्यासी, तत्वज्ञ, तपस्वी।
क
कच - बाल, केश, कुन्तल, चिकुर, अलक, रोम, शिरोरूह।
कमल- नलिन, अरविन्द, उत्पल, राजीव, पद्म, पंकज, नीरज, सरोज, जलज, जलजात, शतदल, पुण्डरीक, इन्दीवर।
कबूतर - कपोत, रक्तलोचन, पारावत, कलरव, हारिल।
कामदेव - मदन, मनोज, अनंग, काम, रतिपति, पुष्पधन्वा, मन्मथ।
कण्ठ - ग्रीवा, गर्दन, गला, शिरोधरा।
कृपा- प्रसाद, करुणा, दया, अनुग्रह।
किताब- पोथी, ग्रन्थ, पुस्तक।
किनारा - तीर, कूल, कगार, तट।
कपड़ा- चीर, वसन, पट, अंशु, कर, मयुख, वस्त्र, अम्बर, परिधान।
किरण- ज्योति, प्रभा, रश्मि, दीप्ति, मरीचि।
किसान- कृषक, भूमिपुत्र, हलधर, खेतिहर, अन्नदाता।
कृष्ण- राधापति, घनश्याम, वासुदेव, माधव, मोहन, केशव, गोविन्द, गिरधारी।
कान- कर्ण, श्रुति, श्रुतिपटल, श्रवण, श्रोत, श्रुतिपुट।
कोयल- कोकिला, पिक, काकपाली, बसंतदूत, सारिका, कुहुकिनी, वनप्रिया।
क्रोध- रोष, कोप, अमर्ष, कोह, प्रतिघात।कीर्ति - यश, प्रसिद्धि।
ख
खग - पक्षी, द्विज, विहग, नभचर, अण्डज, शकुनि, पखेरू।
खंभा स्तूप, स्तम्भ, खंभ।
खल - दुर्जन, दुष्ट, घूर्त, कुटिल।
खून - रक्त, लहू, शोणित, रुधिर।
ग
गज- हाथी, हस्ती, मतंग, कूम्भा, मदकल ।
गाय- गौ, धेनु, सुरभि, भद्रा, रोहिणी।
गंगा- देवनदी, मंदाकिनी, भगीरथी, विश्नुपगा, देवपगा, ध्रुवनंदा, सुरसरिता, देवनदी, जाह्नवी, त्रिपथगा।
गणेश- विनायक, गजानन, गौरीनंदन, गणपति, गणनायक, शंकरसुवन, लम्बोदर, महाकाय, एकदन्त।
गृह- घर, सदन, गेह, भवन, धाम, निकेतन, निवास, आलय, आवास, निलय, मंदिर।
गर्मी- ताप, ग्रीष्म, ऊष्मा, गरमी, निदाघ।
गुरु - शिक्षक, आचार्य, उपाध्याय।
घ
घट - घड़ा, कलश, कुम्भ, निप।
घर - आलय, आवास, गेह, गृह, निकेतन, निलय, निवास, भवन, वास, वास-स्थान, शाला, सदन।
घृत - घी, अमृत, नवनीत।
घास - तृण, दूर्वा, दूब, कुश, शाद।
च
चरण- पद, पग, पाँव, पैर, पाद।चतुर - विज्ञ, निपुण, नागर, पटु, कुशल, दक्ष, प्रवीण, योग्य।
चंद्रमा- चाँद, हिमांशु, इंदु, विधु, तारापति, चन्द्र, शशि, हिमकर, राकेश, रजनीश, निशानाथ, सोम, मयंक, सारंग, सुधाकर, कलानिधि।
चाँदनी - चन्द्रिका, कौमुदी, ज्योत्स्ना, चन्द्रमरीचि, उजियारी, चन्द्रप्रभा, जुन्हाई।
चाँदी - रजत, सौध, रूपा, रूपक, रौप्य, चन्द्रहास।
चोटी - मूर्धा, शीश, सानु, शृंग।
छ
छतरी - छत्र, छाता, छत्ता।
छली - छलिया, कपटी, धोखेबाज।
छवि - शोभा, सौंदर्य, कान्ति, प्रभा।
छानबीन - जाँच, पूछताछ, खोज, अन्वेषण, शोध, गवेषण।
छैला - सजीला, बाँका, शौकीन।
छोर - नोक, कोर, किनारा, सिरा।
ज
जल- अमृत, सलिल, वारि, नीर, तोय, अम्बु, उदक, पानी, जीवन, पय, पेय।
जगत - संसार, विश्व, जग, जगती, भव, दुनिया, लोक, भुवन।
जीभ - रसना, रसज्ञा, जिह्वा, रसिका, वाणी, वाचा, जबान।
जंगल- विपिन, कानन, वन, अरण्य, गहन, कांतार, बीहड़, विटप।
जेवर - गहना, अलंकार, भूषण, आभरण, मंडल।
ज्योति - आभा, छवि, द्युति, दीप्ति, प्रभा, भा, रुचि, रोचि।
झ
झूठ- असत्य, मिथ्या, मृषा, अनृत।
ट
ठ
ड
त
तरुवर - वृक्ष, पेड़, द्रुम, तरु, विटप, रूंख, पादप।
तलवार - असि, कृपाण, करवाल, खड्ग, चन्द्रहास।
तालाब- सरोवर, जलाशय, सर, पुष्कर, पोखरा, जलवान, सरसी, तड़ाग।
तीर - शर, बाण, विशिख, शिलीमुख, अनी, सायक।
द
दास- सेवक, नौकर, चाकर, परिचारक, अनुचर, भृत्य, किंकर।
दधि - दही, गोरस, मट्ठा, तक्र।
दरिद्र- निर्धन, ग़रीब, रंक, कंगाल, दीन।
दिन- दिवस, याम, दिवा, वार, प्रमान, वासर, अह्न।
दीन - ग़रीब, दरिद्र, रंक, अकिंचन, निर्धन, कंगाल।
दीपक - दीप, दीया, प्रदीप।
दुःख- पीड़ा,कष्ट, व्यथा, वेदना, संताप, शोक, खेद, पीर, लेश।
दूध- दुग्ध, क्षीर, पय, गौरस, स्तन्य।
दुष्ट- पापी, नीच, दुर्जन, अधम, खल, पामर।
दाँत - दशन, रदन, रद, द्विज, दन्त, मुखखुर।
दर्पण- शीशा, आरसी, आईना, मुकुर।
दुर्गा- चंडिका, भवानी, कुमारी, कल्याणी, महागौरी, कालिका, शिवा, चण्डी, चामुण्डा।
देवता- सुर, देव, अमर, वसु, आदित्य, लेख, अजर, विबुध।
देह - काया, तन, शरीर, वपु, गात।
ध
धन- दौलत, संपत्ति, सम्पदा, वित्त।
धरती- धरा, धरती, वसुधा, ज़मीन, पृथ्वी, भू, भूमि, धरणी, वसुंधरा, अचला, मही, रत्नवती, रत्नगर्भा।
धनुष- चाप्, शरासन, कमान, कोदंड, धनु।
न
नदी- सरिता, तटिनी, सरि, सारंग, जयमाला, तरंगिणी, दरिया, निर्झरिणी।
नया- नूतन, नव, नवीन, नव्य।
नाव- नौका, तरणी, तरी।
प
पवन- वायु, हवा, समीर, वात, मारुत, अनिल, पवमान, समीरण, स्पर्शन।
पहाड़- पर्वत, गिरि, अचल, शैल, धरणीधर, धराधर, नग, भूधर, महीधर।
पक्षी- खेचर, दविज, पतंग, पंछी, खग, चिडिया, गगनचर, पखेरू, विहंग, नभचर।
पति- स्वामी, प्राणाधार, प्राणप्रिय, प्राणेश, आर्यपुत्र।
पत्नी- भार्या, वधू, वामा, अर्धांगिनी, सहधर्मिणी, गृहणी, बहु, वनिता, दारा, जोरू, वामांगिनी।
पुत्र- बेटा, आत्मज, सुत, वत्स, तनुज, तनय, नंदन।
पुत्री- बेटी, आत्मजा, तनूजा, सुता, तनया।
पुष्प- फूल, सुमन, कुसुम, मंजरी, प्रसून, पुहुप।
फ
फूल - पुष्प, सुमन, कुसुम, गुल, प्रसून।
ब
बादल- मेघ, घन, जलधर, जलद, वारिद, नीरद, सारंग, पयोद, पयोधर।
बालू- रेत, बालुका, सैकत।
बन्दर- वानर, कपि, कपीश, हरि।
बिजली- घनप्रिया, इन्द्र्वज्र, चंचला, सौदामनी, चपला, दामिनी, ताडित, विद्युत।
बगीचा - बाग़, वाटिका, उपवन, उद्यान, फुलवारी, बगिया।
बाण - सर, तीर, सायक, विशिख, शिलीमुख, नाराच।बाल - कच, केश, चिकुर, चूल।
ब्रह्मा - विधि, विधाता, स्वयंभू, प्रजापति, पितामह, चतुरानन, विरंचि, अज, कर्तार, कमलासन, नाभिजन्म, हिरण्यगर्भ।
बलदेव - बलराम, बलभद्र, हलायुध, राम, मूसली, रोहिणेय, संकर्षण।
बहुत - अनेक, अतीव, अति, बहुल, प्रचुर, अपरिमित, प्रभूत, अपार, अमित, अत्यन्त, असंख्य।
ब्राह्मण - द्विज, भूदेव, विप्र, महीदेव, भूमिसुर, भूमिदेव।
भ
भय - भीति, डर, विभीषिका।
भाई - तात, अनुज, अग्रज, भ्राता, भ्रातृ।
भूषण- जेवर, गहना, आभूषण, अलंकार।
भौंरा - मधुप, मधुकर, द्विरेप, अलि, षट्पद,भृंग, भ्रमर।
म
मनुष्य- आदमी, नर, मानव, मानुष, मनुज।
मदिरा- शराब, हाला, आसव, मधु, मद।
मोर- केक, कलापी, नीलकंठ, नर्तकप्रिय।
मधु- शहद, रसा, शहद, कुसुमासव।
मृग- हिरण, सारंग, कृष्णसार।
मछली- मीन, मत्स्य, जलजीवन, शफरी, मकर।
माता- जननी, माँ, अंबा, जनयत्री, अम्मा।
मित्र- सखा, सहचर, साथी, दोस्त।
य
यम - सूर्यपुत्र, जीवितेश, श्राद्धदेव, कृतांत, अन्तक, धर्मराज, दण्डधर, कीनाश, यमराज।
यमुना - कालिन्दी, सूर्यसुता, रवितनया, तरणि-तनूजा, तरणिजा, अर्कजा, भानुजा।
युवति - युवती, सुन्दरी, श्यामा, किशोरी, तरुणी, नवयौवना।
र
रमा - इन्दिरा, हरिप्रिया, श्री, लक्ष्मी, कमला, पद्मा, पद्मासना, समुद्रजा, श्रीभार्गवी, क्षीरोदतनया।
रात- रात्रि, रैन, रजनी, निशा, यामिनी, तमी, निशि, यामा, विभावरी।
राजा- नृप, नृपति, भूपति, नरपति, नृप, भूप, भूपाल, नरेश, महीपति, अवनीपति।
रात्रि - निशा, क्षया, रैन, रात, यामिनी, शर्वरी, तमस्विनी, विभावरी।
रामचन्द्र - अवधेश, सीतापति, राघव, रघुपति, रघुवर, रघुनाथ, रघुराज, रघुवीर, रावणारि, जानकीवल्लभ, कमलेन्द्र, कौशल्यानन्दन।
रावण - दशानन, लंकेश, लंकापति, दशशीश, दशकंध, दैत्येन्द्र।
राधिका - राधा, ब्रजरानी, हरिप्रिया, वृषभानुजा।
ल
लड़का - बालक, शिशु, सुत, किशोर, कुमार।
लड़की - बालिका, कुमारी, सुता, किशोरी, बाला, कन्या।
लक्ष्मी- कमला, पद्मा, रमा, हरिप्रिया, श्री, इंदिरा, पद्मजा, सिन्धुसुता, कमलासना।
लक्ष्मण - लखन, शेषावतार, सौमित्र, रामानुज, शेष।
लौह - अयस, लोहा, सार।लता - बल्लरी, बल्ली, बेली।
व
वायु - हवा, पवन, समीर, अनिल, वात, मारुत।
वसन - अम्बर, वस्त्र, परिधान, पट, चीर।
विधवा - अनाथा, पतिहीना, राँड़।
विष- ज़हर, हलाहल, गरल, कालकूट।
वृक्ष- पेड़, पादप, विटप, तरू, गाछ, दरख्त, शाखी, विटप, द्रुम।
विष्णु- नारायण, दामोदर, पीताम्बर, चक्रपाणी।
विश्व - जगत, जग, भव, संसार, लोक, दुनिया।
विद्युत - चपला, चंचला, दामिनी, सौदामिनी, तड़ित, बीजुरी, घनवल्ली, क्षणप्रभा, करका।
वारिश - वर्षण, वृष्टि, वर्षा, पावस, बरसात।
वीर्य - जीवन, सार, तेज, शुक्र, बीज।
वज्र - कुलिस, पवि, अशनि, दभोलि।
विशाल - विराट, दीर्घ, वृहत, बड़ा, महा, महान।
वृक्ष - गाछ, तरु, पेड़, द्रुम, पादप, विटप, शाखी।
श
शिव- भोलेनाथ, शम्भू, त्रिलोचन, महादेव, नीलकंठ, शंकर।
शरीर- देह, तनु, काया, कलेवर, अंग, गात।
शत्रु- रिपु, दुश्मन, अमित्र, वैरी, अरि, विपक्षी, अराति।
शिक्षक- गुरु, अध्यापक, आचार्य, उपाध्याय।
शेर - केहरि, केशरी, वनराज, सिंह, शार्दूल, हरि, मृगराज।
शेषनाग - अहि, नाग, भुजंग, व्याल, उरग, पन्नग, फणीश, सारंग।
शुभ्र - गौर, श्वेत, अमल, वलक्ष, शुक्ल, अवदात।
शहद - पुष्परस, मधु, आसव, रस, मकरन्द।
श्र
ष
षंड - हीजड़ा, नपुंसक, नामर्द।
षडानन - षटमुख, कार्तिकेय, षाण्मातुर।
स
सीता - वैदेही, जानकी, भूमिजा, जनकतनया, जनकनन्दिनी, रामप्रिया।
साँप- अहि, भुजंग, ब्याल, सर्प, नाग, विषधर, उरग, पवनासन।
सूर्य- रवि, सूरज, दिनकर, प्रभाकर, आदित्य, दिनेश, भास्कर, दिनकर, दिवाकर, भानु, अर्क, तरणि, पतंग, आदित्य, सविता, हंस, अंशुमाली, मार्तण्ड।
संसार- जग, विश्व, जगत, लोक, दुनिया।
सोना- स्वर्ण, कंचन, कनक, हेम, कुंदन।
सिंह- केसरी, शेर, महावीर, हरि, मृगपति, वनराज, शार्दूल, नाहर, सारंग, मृगराज।
समुद्र- सागर, पयोधि, उदधि, पारावार, नदीश, जलधि, सिंधु, रत्नाकर, वारिधि।
सम - सर्व, समस्त, सम्पूर्ण, पूर्ण, समग्र, अखिल, निखिल।
समीप - सन्निकट, आसन्न, निकट, पास।
समूह- दल, झुंड, समुदाय, टोली, जत्था, मण्डली, वृंद, गण, पुंज, संघ, समुच्चय।
सभा - अधिवेशन, संगीति, परिषद, बैठक, महासभा।
सुन्दर - कलित, ललाम, मंजुल, रुचिर, चारु, रम्य, मनोहर, सुहावना, चित्ताकर्षक, रमणीक, कमनीय, उत्कृष्ट, उत्तम, सुरम्य।
सन्ध्या - सायंकाल, शाम, साँझ, प्रदोषकाल, गोधूलि।
स्त्री- सुन्दरी, कान्ता, कलत्र, वनिता, नारी, महिला, अबला, ललना, औरत, कामिनी, रमणी।
सुगंधि- सौरभ, सुरभि, महक, खुशबू।
स्वर्ग- सुरलोक, देवलोक, दिव्यधाम, ब्रह्मधाम, द्यौ, परमधाम, त्रिदिव, दयुलोक।
स्वर्ण - सुवर्ण, कंचन, हेन, हारक, जातरूप, सोना, तामरस, हिरण्य।
सरस्वती - गिरा, शारदा, भारती, वीणापाणि, विमला, वागीश, वागेश्वरी।
सहेली - आली, सखी, सहचरी, सजनी, सैरन्ध्री।
संसार - लोक, जग, जहान, जगत, विश्व।
ह
हस्त - हाथ, कर, पाणि, बाहु, भुजा।
हिमालय- हिमगिरी, हिमाचल, गिरिराज, पर्वतराज, नगेश।
हिरण - सुरभी, कुरग, मृग, सारंग, हिरन।
होंठ - अक्षर, ओष्ठ, ओंठ।
हनुमान - पवनसुत, पवनकुमार, महावीर, रामदूत, मारुततनय, अंजनीपुत्र, आंजनेय, कपीश्वर, केशरीनंदन, बजरंगबली, मारुति।
हिमांशु - हिमकर, निशाकर, क्षपानाथ, चन्द्रमा, चन्द्र, निशिपति।
हंस - कलकंठ, मराल, सिपपक्ष, मानसौक।
हृदय- छाती, वक्ष, वक्षस्थल, हिय, उर।
हाथ- हस्त, कर, पाणि।
हाथी- नाग, हस्ती, राज, कुंजर, कूम्भा, मतंग, वारण, गज, द्विप, करी, मदकल।
त्र
ज्ञ
[Hindi] समास - परिभाषा, प्रकार, उदाहरण सहित।
परिभाषा:
‘समास’ शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है ‘छोटा-रूप’। अतः जब दो या दो से अधिक शब्द (पद) अपने बीच की विभक्तियों का लोप कर जो छोटा रूप बनाते हैं, उसे समास, सामासिक शब्द या समस्त पद कहते हैं। जैसे ‘रसोई के लिए घर’ शब्दों में से ‘के लिए’ विभक्ति का लोप करने पर नया शब्द बना ‘रसोई घर’, जो एक सामासिक शब्द है।
किसी समस्त पद या सामासिक शब्द को उसके विभिन्न पदों एवं विभक्ति सहित पृथक् करने की क्रिया को समास का विग्रह कहते हैं जैसे विद्यालय विद्या के लिए आलय, माता-पिता=माता और पिता।
प्रकार:
समास छः प्रकार के होते हैं-
1. अव्ययीभाव समास,
2. तत्पुरुष समास
3. द्वन्द्व समास
4.बहुब्रीहि समास
5. द्विगु समास
6. कर्म धारय समास
1.अव्ययीभाव समास:
अव्ययीभाव समास में प्रायः
(i)पहला पद प्रधान होता है।
(ii) पहला पद या पूरा पद अव्यय होता है।
(वे शब्द जो लिंग, वचन, कारक,
काल के अनुसार नहीं बदलते, उन्हें अव्यय कहते हैं)
(iii)यदि एक शब्द की पुनरावृत्ति हो और दोनों शब्द मिलकर अव्यय की तरह प्रयुक्त हो, वहाँ भी अव्ययीभाव समास होता है।
(iv) संस्कृत के उपसर्ग युक्त पद भी अव्ययीभव समास होते हैं-
यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार।
यथाशीघ्र = जितना शीघ्र हो
यथाक्रम = क्रम के अनुसार
यथाविधि = विधि के अनुसार
यथावसर = अवसर के अनुसार
यथेच्छा = इच्छा के अनुसार
प्रतिदिन = प्रत्येक दिन। दिन-दिन। हर दिन
प्रत्येक = हर एक। एक-एक। प्रति एक
प्रत्यक्ष = अक्षि के आगे
घर-घर = प्रत्येक घर। हर घर। किसी भी घर को न छोड़कर
हाथों-हाथ = एक हाथ से दूसरे हाथ तक। हाथ ही हाथ में
रातों-रात = रात ही रात में
बीचों-बीच = ठीक बीच में
साफ-साफ = साफ के बाद साफ। बिल्कुल साफ
आमरण = मरने तक। मरणपर्यन्त
आसमुद्र = समुद्रपर्यन्त
भरपेट = पेट भरकर
अनुकूल = जैसा कूल है वैसा
यावज्जीवन = जीवनपर्यन्त
निर्विवाद = बिना विवाद के
दर असल = असल में
बाकायदा = कायदे के अनुसार
2.तत्पुरुष समास:
(i)तत्पुरुष समास में दूसरा पद (पर पद) प्रधान होता है अर्थात् विभक्ति का लिंग, वचन दूसरे पद के अनुसार होता है।
(ii) इसका विग्रह करने पर कत्र्ता व सम्बोधन की विभक्तियों (ने, हे, ओ, अरे) के अतिरिक्त
किसी भी कारक की विभक्ति प्रयुक्त होती है तथा विभक्तियों के अनुसार ही इसके उपभेद होते हैं।
जैसे –
(क) कर्म तत्पुरुष (को)
कृष्णार्पण = कृष्ण को अर्पण
नेत्र सुखद = नेत्रों को सुखद
वन-गमन = वन को गमन
जेब कतरा = जेब को कतरने वाला
प्राप्तोदक = उदक को प्राप्त
(ख) करण तत्पुरुष (से/के द्वारा)
ईश्वर-प्रदत्त = ईश्वर से प्रदत्त
हस्त-लिखित = हस्त (हाथ) से लिखित
तुलसीकृत = तुलसी द्वारा रचित
दयार्द्र = दया से आर्द्र
रत्न जडि़त = रत्नों से जडि़त
(ग) सम्प्रदान तत्पुरुष (के लिए)
हवन-सामग्री = हवन के लिए सामग्री
विद्यालय = विद्या के लिए आलय
गुरु-दक्षिणा = गुरु के लिए दक्षिणा
बलि-पशु = बलि के लिए पशु
(घ) अपादान तत्पुरुष (से पृथक्)
ऋण-मुक्त = ऋण से मुक्त
पदच्युत = पद से च्युत
मार्ग भ्रष्ट = मार्ग से भ्रष्ट
धर्म-विमुख = धर्म से विमुख
देश-निकाला = देश से निकाला
(च) सम्बन्ध तत्पुरुष (का, के, की)
मन्त्रि-परिषद् = मन्त्रियों की परिषद्
प्रेम-सागर = प्रेम का सागर
राजमाता = राजा की माता
अमचूर =आम का चूर्ण
रामचरित = राम का चरित
(छ) अधिकरण तत्पुरुष (में, पे, पर)
वनवास = वन में वास
जीवदया = जीवों पर दया
ध्यान-मग्न = ध्यान में मग्न
घुड़सवार = घोड़े पर सवार
घृतान्न = घी में पक्का अन्न
कवि पुंगव = कवियों में श्रेष्ठ
3. द्वन्द्व समास
(i)द्वन्द्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं।
(ii) दोनों पद प्रायः एक दूसरे के विलोम होते हैं, सदैव नहीं।
(iii)इसका विग्रह करने पर ‘और’, अथवा ‘या’ का प्रयोग होता है।
माता-पिता = माता और पिता
दाल-रोटी = दाल और रोटी
पाप-पुण्य = पाप या पुण्य/पाप और पुण्य
अन्न-जल = अन्न और जल
जलवायु = जल और वायु
फल-फूल = फल और फूल
भला-बुरा = भला या बुरा
रुपया-पैसा = रुपया और पैसा
अपना-पराया = अपना या पराया
नील-लोहित = नीला और लोहित (लाल)
धर्माधर्म = धर्म या अधर्म
सुरासुर = सुर या असुर/सुर और असुर
शीतोष्ण = शीत या उष्ण
यशापयश = यश या अपयश
शीतातप = शीत या आतप
शस्त्रास्त्र = शस्त्र और अस्त्र
कृष्णार्जुन = कृष्ण और अर्जुन
4. बहुब्रीहि समास
(i)बहुब्रीहि समास में कोई भी पद प्रधान नहीं होता।
(ii) इसमें प्रयुक्त पदों के सामान्य अर्थ की अपेक्षा अन्य अर्थ
की प्रधानता रहती है।
(iii)इसका विग्रह करने पर ‘वाला, है, जो, जिसका, जिसकी, जिसके, वह आदि
आते हैं।
गजानन = गज का आनन है जिसका वह (गणेश)
त्रिनेत्र = तीन नेत्र हैं जिसके वह (शिव)
चतुर्भुज = चार भुजाएँ हैं जिसकी वह (विष्णु)
षडानन = षट् (छः) आनन हैं जिसके वह (कार्तिकेय)
दशानन = दश आनन हैं जिसके वह (रावण)
घनश्याम = घन जैसा श्याम है जो वह (कृष्ण)
पीताम्बर = पीत अम्बर हैं जिसके वह (विष्णु)
चन्द्रचूड़ = चन्द्र चूड़ पर है जिसके वह
गिरिधर = गिरि को धारण करने वाला है जो वह
मुरारि = मुर का अरि है जो वह
आशुतोष = आशु (शीघ्र) प्रसन्न होता है जो वह
नीललोहित = नीला है लहू जिसका वह
वज्रपाणि = वज्र है पाणि में जिसके वह
सुग्रीव = सुन्दर है ग्रीवा जिसकी वह
मधुसूदन = मधु को मारने वाला है जो वह
आजानुबाहु = जानुओं (घुटनों) तक बाहुएँ हैं जिसकी वह
नीलकण्ठ = नीला कण्ठ है जिसका वह
महादेव = देवताओं में महान् है जो वह
मयूरवाहन = मयूर है वाहन जिसका वह
कमलनयन = कमल के समान नयन हैं जिसके वह
कनकटा = कटे हुए कान है जिसके वह
जलज = जल में जन्मने वाला है जो वह (कमल)
वाल्मीकि = वल्मीक से उत्पन्न है जो वह
दिगम्बर = दिशाएँ ही हैं जिसका अम्बर ऐसा वह
कुशाग्रबुद्धि = कुश के अग्रभाग के समान बुद्धि है जिसकी
वह
मन्द बुद्धि = मन्द है बुद्धि जिसकी वह
जितेन्द्रिय = जीत ली हैं इन्द्रियाँ जिसने वह
चन्द्रमुखी = चन्द्रमा के समान मुखवाली है जो वह
अष्टाध्यायी = अष्ट अध्यायों की पुस्तक है जो वह
5. द्विगु समास
(i)द्विगु समास में प्रायः पूर्वपद संख्यावाचक होता है तो कभी-कभी परपद भी संख्यावाचक देखा जा सकता है।
(ii) द्विगु समास में प्रयुक्त संख्या किसी समूह का बोध कराती है अन्य अर्थ का नहीं, जैसा कि बहुब्रीहि समास में देखा है।
(iii)इसका विग्रह करने पर ‘समूह’ या ‘समाहार’ शब्द प्रयुक्त होता है।
दोराहा = दो राहों का समाहार
पक्षद्वय = दो पक्षों का समूह
सम्पादक द्वय = दो सम्पादकों का समूह
त्रिभुज = तीन भुजाओं का समाहार
त्रिलोक या त्रिलोकी = तीन लोकों का समाहार
त्रिरत्न = तीन रत्नों का समूह
संकलन-त्रय = तीन का समाहार
भुवन-त्रय = तीन भुवनों का समाहार
चैमासा/चतुर्मास = चार मासों का समाहार
चतुर्भुज = चार भुजाओं का समाहार (रेखीय आकृति)
चतुर्वर्ण = चार वर्णों का समाहार
पंचामृत = पाँच अमृतों का समाहार
पं चपात्र = पाँच पात्रों का समाहार
पंचवटी = पाँच वटों का समाहार
षड्भुज = षट् (छः) भुजाओं का समाहार
सप्ताह = सप्त अहों (सात दिनों) का समाहार
सतसई = सात सौ का समाहार
सप्तशती = सप्त शतकों का समाहार
सप्तर्षि = सात ऋषियों का समूह
अष्ट-सिद्धि = आठ सिद्धियों का समाहार
नवरत्न = नौ रत्नों का समूह
नवरात्र = नौ रात्रियों का समाहार
दशक = दश का समाहार
शतक = सौ का समाहार
शताब्दी = शत (सौ) अब्दों (वर्षों) का समाहार
6. कर्मधारय समास
(i)कर्मधारय समास में एक पद विशेषण होता है तो दूसरा पद विशेष्य।
(ii) इसमें कहीं कहीं उपमेय उपमान का सम्बन्ध होता है तथा विग्रह करने पर ‘रूपी’
शब्द प्रयुक्त होता है –
पुरुषोत्तम = पुरुष जो उत्तम
नीलकमल = नीला जो कमल
महापुरुष = महान् है जो पुरुष
घन-श्याम = घन जैसा श्याम
पीताम्बर = पीत है जो अम्बर
महर्षि = महान् है जो ऋषि
नराधम = अधम है जो नर
अधमरा = आधा है जो मरा
रक्ताम्बर = रक्त के रंग का (लाल) जो अम्बर
कुमति = कुत्सित जो मति
कुपुत्र = कुत्सित जो पुत्र
दुष्कर्म = दूषित है जो कर्म
चरम-सीमा = चरम है जो सीमा
लाल-मिर्च = लाल है जो मिर्च
कृष्ण-पक्ष = कृष्ण (काला) है जो पक्ष
मन्द-बुद्धि = मन्द जो बुद्धि
शुभागमन = शुभ है जो आगमन
नीलोत्पल = नीला है जो उत्पल
मृग नयन = मृग के समान नयन
चन्द्र मुख = चन्द्र जैसा मुख
राजर्षि = जो राजा भी है और ऋषि भी
नरसिंह = जो नर भी है और सिंह भी
मुख-चन्द्र = मुख रूपी चन्द्रमा
वचनामृत = वचनरूपी अमृत
भव-सागर = भव रूपी सागर
चरण-कमल = चरण रूपी कमल
क्रोधाग्नि = क्रोध रूपी अग्नि
चरणारविन्द = चरण रूपी अरविन्द
विद्या-धन = विद्यारूपी धन
[Hindi] विलोम शब्द (विपरीतार्थक शब्द)।
शब्द - विलोम
अल्पायु - दीर्घायु
आश्रित - निराश्रित
अरुचि - रुचि
आरंभ - अंत
अवनति - उन्नति
अथ - इति
आमिष - निरामिष
अनुकूल - प्रतिकूल
आहार - निराहार
अमृत - विष
आकाश - पाताल
क्रिया - प्रतिक्रिया
कड़वा - मीठा
उदय - अस्त
कर्म - निष्कर्म
आलस्य - स्फूर्ति
गहरा - उथला
आदि - अनादि
गुण - दोष
इच्छित - अनिच्छित
चर - अचर
उदार अनुदार
जड़ - चेतन
उत्थान - पतन
उत्तर - दक्षिण
एक - अनेक
दिन - रात
मानवता - दानवता
धीर - अधीर
मित्र - शत्रु
नकली - असली
मौखिक - लिखित
निकट - दूर
पतिव्रता - कुलटा
राग - द्वेष
पवित्र - अपवित्र
प्रेम - घृणा
पूर्ण - अपूर्ण
विरोध - समर्थन
बंधन - मुक्ति
शीत - उष्ण
मंगल - अमंगल
शुक्ल - कृष्ण
स्वदेश - विदेश
स्वाधीन - पराधीन
ज्ञान - अज्ञान
सुपुत्र - कुपुत्र
सच - झूठ
स्तुति - निंदा
विषम - सम
अल्पायु - दीर्घायु
आश्रित - निराश्रित
अरुचि - रुचि
आरंभ - अंत
अवनति - उन्नति
अथ - इति
आमिष - निरामिष
अनुकूल - प्रतिकूल
आहार - निराहार
अमृत - विष
आकाश - पाताल
क्रिया - प्रतिक्रिया
कड़वा - मीठा
उदय - अस्त
कर्म - निष्कर्म
आलस्य - स्फूर्ति
गहरा - उथला
आदि - अनादि
गुण - दोष
इच्छित - अनिच्छित
चर - अचर
उदार - अनुदार
जड़ - चेतन
उत्थान - पतन
उत्तर - दक्षिण
एक - अनेक
दिन - रात
मानवता - दानवता
धीर - अधीर
मित्र - शत्रु
नकली - असली
मौखिक - लिखित
निकट - दूर
पतिव्रता - कुलटा
राग - द्वेष
पवित्र - अपवित्र
प्रेम - घृणा
पूर्ण - अपूर्ण
विरोध - समर्थन
बंधन - मुक्ति
शीत - उष्ण
मंगल - अमंगल
शुक्ल - कृष्ण
स्वदेश - विदेश
स्वाधीन - पराधीन
ज्ञान - अज्ञान
सुपुत्र - कुपुत्र
सच - झूठ
स्तुति - निंदा
विषम - सम
अनिवार्य - वैकल्पिक
अभिमान - नम्रता
अर्थ - अनर्थ
आकर्षण - विकर्षण
आजादी - गुलामी
अनुराग - विराग
अपमान - सम्मान
अनुज - अग्रज
आदान - प्रदान
अर्वाचीन - प्राचीन
अवनी - अंबर
आदर - अनादर
क्रुद्ध - शान्त
आयात - निर्यात
खिलना - मुरझाना
आर्य - अनार्य