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[Science] Sensory System - ज्ञानेन्द्रियाँ।

•ज्ञानेन्द्रियां वातावरण के परिवर्तनों को ग्रहण करने वाले अंगो को कहते हैं। आँख, कान, नाक, जीभ, त्वचा प्रमुख ज्ञानेन्द्रिय हैं। आंख का सम्बन्ध दृष्टि से है। नाक द्वारा सूँघकर किसी वस्तु की सुगंध को ज्ञात किया जा सकता है। जीभ पर उपस्थित स्वाद कलिकाओं से भोजन के स्वाद की जानकारी प्राप्त होती है।

•आँख या नेत्र जीवधारियों का वह अंग है जो प्रकाश के प्रति संवेदनशीलन है। यह प्रकाश को संसूचित करके उसे तंत्रिका कोशिकाओ द्वारा विद्युत-रासायनिक संवेदों में बदल देता है। उच्चस्तरीय जन्तुओं की आँखें एक जटिल प्रकाशीय तंत्र की तरह होती हैं जो आसपास के वातावरण से प्रकाश एकत्र करता है; मध्यपट के द्वारा आंख में प्रवेश करने वाले प्रकाश की तीव्रता का नियंत्रण करता है; इस प्रकाश को लेंसों की सहायता से सही स्थान पर ध्यान करता है (जिससे प्रतिबिम्ब बनता है); इस प्रतिबिम्ब को विद्युत संकेतों में बदलता है; इन संकेतों को तंत्रिका कोशिकाओ के माध्यम से मस्तिष्क के पास भेजता है।

•कान श्रवण प्रणाली का मुख्य अंग है। कान वह अंग है जो ध्वनि का पता लगाता है, यह न केवल ध्वनि के लिए एक ग्राहक (रिसीवर) के रूप में कार्य करता है, अपितु शरीर के संतुलन और स्थिति के बोध में भी एक प्रमुख भूमिका निभाता है। "कान" शब्द को पूर्ण अंग या सिर्फ दिखाई देने वाले भाग के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है। बाह्यकर्ण श्रवण प्रक्रिया के कई कदमो मे से सिर्फ पहले कदम पर ही प्रयुक्त होता है और शरीर को संतुलन बोध कराने में कोई भूमिका नहीं निभाता। कशेरुकी प्राणियों मे कान जोड़े मे सममितीय रूप से सिर के दोनो ओर उपस्थित होते हैं। यह व्यवस्था ध्वनि स्रोतों की स्थिति निर्धारण करने में सहायक होती है।

•नाक रीढ़धारी प्राणियों में पाया जाने वाला छिद्र है। इससे हवा शरीर में प्रवेश करती है जिसका उपयोग श्वसन क्रिया में होता है। नाक द्वारा सूँघकर किसी वस्तु की सुगंध को ज्ञात किया जा सकता है।

•जीभ मुख के तल पर एक पेशी होती है, जो भोजन को चबाना और निगलना आसान बनाती है। यह स्वाद अनुभव करने का प्रमुख अंग होता है, क्योंकि जीभ स्वाद अनुभव करने का प्राथमिक अंग है, जीभ की ऊपरी सतह पेपिला और स्वाद कलिकाओं से ढंकी होती है। जीभ का दूसरा कार्य है स्वर नियंत्रित करना. यह संवेदनशील होती है और लार द्वारा नम बनी रहती है, साथ ही इसे हिलने-डुलने में मदद करने के लिए इसमें बहुत सारी तंत्रिकाएं तथा रक्त वाहिकाएं मौजूद होती हैं।

•त्वचा (skin) शरीर का बाह्य आवरण होती है। चूंकि यह सीधे वातावरण के संपर्क मे आती है, इसलिए त्वचा रोगजनकों के खिलाफ शरीर की सुरक्षा में एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके अन्य कार्यों मे जैसे तापावरोधन (इन्सुलेशन), तापमान विनियमन, संवेदना, विटामिन डी का संश्लेषण और विटामिन बी फोलेट का संरक्षण करती है। बुरी तरह से क्षतिग्रस्त त्वचा निशान ऊतक बना कर चंगा होने की कोशिश करती है। यह अक्सर रंगहीन और वर्णहीन होता है।
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[Science] वसा।

•वसा शरीर को क्रियाशील बनाए रखने में सहयोग करती है। वसा शरीर के लिए उपयोगी है, किंतु इसकी अधिकता हानिकारक भी हो सकती है। यह मांस तथा वनस्पति समूह दोनों प्रकार से प्राप्त होती है। इससे शरीर को दैनिक कार्यों के लिए शक्ति प्राप्त होती है।

•वसा को शक्तिदायक ईंधन भी कहा जाता है। एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए 100 ग्राम चिकनाई का प्रयोग करना आवश्यक है। इसको पचाने में शरीर को काफ़ी समय लगता है। यह शरीर में प्रोटीन की आवश्यकता को कम करने के लिए आवश्यक होती है।

•वसा का शरीर में अत्यधिक मात्रा में बढ़ जाना उचित नही होता । यह संतुलित आहार द्वारा आवश्यक मात्रा में ही शरीर को उपलब्ध कराई जानी चाहिए। अधिक मात्रा जानलेवा भी हो सकती है।

•खाद्य पदार्थों दो प्रकार की वसा होती है: संतृप्त (Saturated), असंतृप्त (Unsaturated) वसा। संतृप्त वसा नुकसानदेह कोलेस्ट्रॉल बढ़ाती है, इसे सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए। मक्खन, शुद्ध घी, वनस्पति घी, नारियल और ताड़ का तेल संतृप्त वसा के प्रमुख स्रोत हैं।  असंतृप्त वसा सीमित मात्रा में ठीक कही जा सकती है। असंतृप्त वसा के प्रमुख स्रोत मूंगफली, सरसों, सूरजमुखी, सोयाबीन तेल हैं ।

[Science] कार्बोहाइड्रेड्स - श्रोत,प्रकार एवं तथ्य।

• कार्बोहाइड्रेट्स, कार्बनिक पदार्थ हैं जिसमें कार्बन, हाइड्रोजन व आक्सीजन होते है। कुछ कार्बोहाइड्रेट्स सजीवों के शरीर के रचनात्मक तत्वों का निर्माण करते हैं जैसे कि सेल्यूलोज, हेमीसेल्यूलोज, काइटिन तथा पेक्टिन। जबकि कुछ कार्बोहाइड्रेट्स उर्जा प्रदान करते हैं, जैसे कि मण्ड, शर्करा, ग्लूकोज़, ग्लाइकोजेन. कार्बोहाइड्रेट्स स्वाद में मीठा होते हैं।

• कार्बोहाइड्रेट्स शरीर मे शक्ति उत्पन्न करने का प्रमुख स्रोत है। शरीर को शक्ति और गर्मी प्रदान करने के लिए चर्बी की भांति यह कार्य करता है। कार्बोहाइड्रेट्स चर्बी की अपेक्षा शरीर मे जल्दी पच जाते है।

• शरीर को कार्बोहाइड्रेट्स दो प्रकार से प्राप्त होते है, पहला माड़ी अर्थात स्टार्च तथा दूसरा चीनी अर्थात शुगर। गेहूं, ज्वार, मक्का, बाजरा, मोटे अनाज तथा चावल और दाल तथा जड़ो वाली सब्जियो मे पाए जाने वाले कार्बोहाइड्रेट्स को माड़ी कहा जाता है। केला, अमरूद, गन्ना, चुकंदर, खजूर, छुआरा, मुनक्का, अंजीर, शक्कर, शहद, मीठी सब्जिया, सभी मीठी खाद्य से प्राप्त होने वाले कार्बोहाइड्रेट्स अत्यधिक शक्तिशाली और स्वास्थ्य के लिय लाभदायक होते है

• कार्बोहाइड्रेट्स की अधिकता अनेक खतरनाक जानलेवा रोगो को भी जन्म देती है जिसमे प्रमुख रूप से अजीर्ण, मधुमेह, अतिसार रोग होते है। इसमे अत्यधिक वजन बढ जाने से भी जीवन को खतरा उत्पन्न हो जाता है।

[Science] प्रकश संश्लेषण एवं सम्बंधित तथ्य।

• सजीव कोशिकाओं के द्वारा प्रकाशीय उर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करने की क्रिया को प्रकाश संश्लेषण (फोटोसिन्थेसिस) कहते है।

• प्रकाश संश्लेषण वह क्रिया है जिसमें पौधे अपने हरे रंग वाले अंगो जैसे पत्ती, द्वारा सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में वायु से कार्बनडाइऑक्साइड तथा भूमि से जल लेकर जटिल कार्बनिक खाद्य पदार्थों जैसे कार्बोहाइड्रेट्स का निर्माण करते हैं तथा आक्सीजन (O2) बाहर निकालते हैं।

• प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में पौधों की हरी पत्तियों की कोंशिकाओं के अन्दर कार्बन डाइआक्साइड और पानी के संयोग से पहले साधारण कार्बोहाइड्रेट और बाद में जटिल काबोहाइड्रेट का निर्माण होता है।

• इस प्रक्रिया में आक्सीजन एवं ऊर्जा से भरपूर कार्बोहाइड्रेट (सूक्रोज, ग्लूकोज, स्टार्च (मंड) आदि) का निर्माण होता है तथा आक्सीजन गैस बाहर निकलती है। जल, कार्बनडाइऑक्साइड, सूर्य का प्रकाश तथा क्लोरोफिल (हरितलवक) को प्रकाश संश्लेषण का अवयव कहते हैं। इसमें से जल तथा कार्बनडाइऑक्साइड को प्रकाश संश्लेषण का कच्चा माल कहा जाता है।

• प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया सबसे महत्वपूर्ण जैवरासायनिक अभिक्रियाओं में से एक है। सीधे या परोक्ष रूप से दुनिया के सभी सजीव इस पर आश्रित हैं। प्रकाश संश्वेषण करने वाले सजीवों को स्वपोषी कहते हैं।

• रासायनिक समीकरण
6 CO2 + 12 H2O + प्रकाश + क्लोरोफिल → C6H12O6 + 6 O2 + 6 H2O + क्लोरोफिल

कार्बन डाईआक्साइड + पानी + प्रकाश + क्लोरोफिल → ग्लूकोज + ऑक्सीजन + पानी + क्लोरोफिल
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मापक यन्त्र एवं उनके उपयोग (Measurment Instrument & Use)

मापक यन्त्र/
उपयोग

1अमीटर
विद्युत धारा का मापन
2.धारितामापी (Capacitance meter)
किसी अवयव की धारिता मापना है।
3.विकृतिमापी (Distortionmeter)
किसी परिपथ में जोड़ी गई विकृत्ति (distortion) की माप
4.विद्युत-मापी (Electricity meter)
खपत की गयी विद्युत ऊर्जा का मापन
5.आवृत्ति गणित्र (Frequency counter)
आवृत्ति का मापन
6.LCR मीटर
प्रेरकत्व, धारिता तथा प्रतिरोध मापता है।
7.माइक्रोवेव शक्तिमापी
माइक्रोरोवेव आवृत्ति पर शक्ति का मापन
8.बहुमापी (Multimeter)
वोल्टेज, धारा, प्रतिरोध एवं कुछ अन्य चीजें मापने का आम
उपकरण
9.नेटवर्क विश्लेषक
नेटवर्क के पैरामीटरों का मापन
10.ओममापी (Ohmmeter)
किसी अवयव का प्रतिरोध मापता है।
11.दोलनदर्शी (Oscilloscope)
किसी वैद्युत संकेत का तरंगरूप (waveform) प्रदर्शित
करता है।
12.Psophometer
श्रव्य आवृत्ति के संकेत तथा उस पर रव का मापन
13.Q मापी
रेडियो आवृत्ति के परिपथों का Q-मापन
संकेत विश्लेषक (Signal analyzer)
RF संकेतों का आयाम एवं मॉडुलेशन का मापन
14.संकेत जनित्र (Signal generator)
परीक्षण के लिए आवश्यक विद्युत संकेत पैदा करता है।
15.स्पेक्ट्रम विश्लेषक (Spectrum analyser)
विद्युत संकेतों का आवृत्ति-स्पेक्ट्रम दिखाता है।
16.स्वीप जनरेटर
नियत आयाम और परिवर्ती आवृत्ति के साइन-तरंग पैदा करता
है जिससे आवृत्ति-अनुक्रिया (frequency response)
निकालने में मदद मिलती है।
17.ट्रांजिस्टर टेस्टर
ट्रांजिस्टर (BJT) का परीक्षण
ट्यूब टेस्टर
निर्वात नलिकाओं (ट्रायोड, टेट्रोड) आदि का परीक्षण
18.वाटमापी
विद्युत शक्ति का मापन
19.सदिशदर्शी (Vectorscope)
रंगीन टीवी के रंगों की कला (फेज) दर्शाता है।
20विडियो संकेत जनित्र
परीक्षण के लिए विडियो संकेत पैदा करता है।
21.वोल्टमापी (Voltmeter)
किसी परिपथ के किन्ही दो बिन्दों के बीच का विभवान्तर
मापता है।
22.VU मीटर
AF संकेतों के स्तर का मापन
23.ओपीसोमीटर
दूरी मापन मेँ
24.हाइग्रोमीटर
सापेक्षिक आद्रर्ता के मापन में