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पीरियॉडिक टेबल के चार नए तत्वों का नामकरण एवं वर्गीकरण।

पीरियॉडिक टेबल के चार नए तत्वों का नामकरण:

रसायन विज्ञान की किताबों में अब संशोधन का वक्त आ गया है। पीरियॉडिक टेबल (आवर्त सारणी) के चार नए तत्वों को नाम दिया गया है।

रसायन शास्त्र से जुड़े शोध का काम देखने वाली अंतर्राष्ट्रीय संस्था आईयूपीएसी (इंटरनेशनल यूनियन ऑफ प्योर एंड एप्लाइड केमिस्ट्री) ने पीरियॉडिक टेबल के चार नए तत्वों का नाम निहोनियम, मोस्कोवियम, टेनिसाइन और ओगेनिशन रखा है। इन चारों तत्वों का एटॉमिक नंबर क्रमश: 113, 115, 117 और 118 है।
8 जून को आईयूपीएसी ने सार्वजनिक समीक्षा के लिए चार रासायनिक तत्वों का नाम उजागर किया। गौरतलब है कि आईयूपीएसी (इंटरनेशनल यूनियन ऑफ प्योर एंड एप्लाइड केमिस्ट्री) ने 30 दिसंबर, 2015 को चार नए रासायनिक तत्वों की खोज की पुष्टि की थी।

इसके बाद जनवरी 2016 में आईयूपीएसी ने इन चारों नए तत्वों को आवर्त सारणी में स्थायी जगह देने की मंजूरी दी थी। इस खोज से आवर्त सारणी की सातवीं पंक्ति, जिसे रासायनिक भाषा में आवर्त कहते हैं, पूर्ण हो गई।

अब तक इन तत्वों को उनुन्ट्रियम (113), उनुन्पेंटियम (115), उनुन्सेप्टियम (117) और उनुनोक्टियम (118) के नाम से जाना जाता था। हालांकि इन तत्वों के नामों को अस्थायी रूप से स्वीकार किया गया था. जिन्हें बाद में स्थायी नाम और प्रतीक चिह्न दिए जाने की घोषणा की गई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, रूस और अमेरिकी शोधकर्ताओं की टीम को तत्व 115, 117 और 118 की खोज का श्रेय दिया गया था। वहीं, तत्व 113 की खोज का श्रेय जापानी टीम को मिला था।

नए तत्वों का वर्गीकरण:

निहोनियम (Nh)- 113
निहोनियम की खोज जापान में हुई थी। ये पहला तत्व है, जिसकी खोज किसी एशियाई देश में हुई है।
मोस्कोवियम (Mc)- 115
मोस्कोवियम का नाम रूस की राजधानी मॉस्को के नाम पर रखा गया है।
टेनिसाइन (Ts)- 117
टेनिसाइन का नाम टेनिसी क्षेत्र में स्थित ओक रिज नेशनल लेबोरेट्री, वेंडरविल्ट यूनीवर्सिटी और यूनीवर्सिटी ऑफ टेनिसी के नाम पर रखा गया है। इन सभी ने टेनिसाइन तत्व की खोज में योगदान दिया है।
ओगेनिशन (Og)- 118
इस तत्व का नाम रूस के भौतिक विज्ञानी यूरी ओगेनिशियन के नाम पर रखा गया है।

[योजना] राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना-2016

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना-2016
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1 जून, 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में ‘राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना-2016’ (NDMP) जारी की।देश में पहली बार इस तरह की राष्ट्रीय योजना तैयार की गई है।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं :-
(i) यह योजना आपदा जोखिम घटाने के लिए सेंडई फ्रेमवर्क में तय किए गए लक्ष्यों और प्राथमिकताओं के साथ मोटे तौर पर तालमेल करेगा
(ii) इस योजना का विजन भारत को आपदा से उबरने में अधिक सक्षम बनाना है
(iii) प्रत्येक खतरे के लिए, सेंडई फ्रेमवर्क में घोषित चार प्राथमिकताओं को आपदा जोखिम में कमी करने के फ्रेमवर्क में शामिल किया गया है। इसके लिए पांच कार्यक्षेत्र निम्न हैंः
(a) जोखिम को समझना
(b) एजेंसियों के बीच सहयोग
(c) डीआरआर में सहयोग-संरचनात्मक उपाय
(d) डीआरआर में सहयोग-गैर-संरचनात्मक उपाय
(e) क्षमता विकास
(iv) इस योजना के कार्यकारी हिस्से की पहचान 18 बड़े कार्यों के रूप में की गई है, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
(a) पूर्व चेतावनी, मानचित्र, उपग्रह इनपुट, सूचना प्रसार।
(b) पशुओं और लोगों की निकासी।
(c) पशुओं और लोगों को ढूंढ़ना और बचाना।
(d) स्वास्थ्य सेवाएं।
(e) पयेजल/निर्जलीकरण पंप/स्वच्छता सुविधाएं/सार्वजनिक स्वास्थ्य।
(f) खाद और आवश्यक आपूर्ति
(g) संचार
(h) आवास और झोपड़ियों
(t) बिजली
(j) ईंधन
(k) परिवहन
(l) राहत रसद और आपूर्ति ऋंखला प्रबंधन
(m) पशु के शवों का निपटान
(n) प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए चारा
(o) पुनर्वास एवं पशुधन और अन्य जानवरों के लिए पशु चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करना
(p) डेटा संग्रह और प्रबंधन
(q) राहत रोजगार
(r) मीडिया संपर्क
(v) 6 क्षेत्रों में केंद्र और राज्य सरकारें आपदा जोखिम शासन प्रणाली को मजबूत करने के लिए कार्रवाईयां करेंगी।
(a) मुख्यधारा और एकीकृत डीआरआर और संस्थागत सुदृढ़ीकरण
(b) विकास क्षमता
(c) भागीदारीपूर्ण नजरिये को बढ़ावा देना
(d) चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ काम करना।
(e) शिकायत निवारण प्रणाली
(f) आपदा जोखिम प्रबंधन के लिए गुणवत्ता वाले मानकों, प्रमाणीकरण, आदि को बढ़ावा देना।
(vi) राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना आपदा प्रबंधन चक्र के सभी चरणों के लिए सरकारी एजें

क्या हैें न्युक्लीअर सप्लायर ग्रुप? जानिए इस ग्रुप के बारे में।

आखिरकार न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) में शामिल जिस देश में प्रधानमंत्री पहुंचते है वहां पर क्यों एनएसजी को लेकर चर्चाएं शुरू हो जाती है. क्यों भारत को इस ग्रुप में शामिल करने के लिए स्विट्जरलैंड से लेकर अमेरिका और अब मेक्सिको तक अपना हाथ आगे बढ़ा रहे है.

एनएसजी की सदस्यता लेना भारत के लिए कितना आवश्यक है और इसके मिलने से भारत को क्या फायदे हो सकते है? आखिर क्यों एनएसजी से जुड़े जिस भी देश में प्रधानमंत्री जा रहे है वहां के राष्ट्राध्यक्ष भारत को शामिल करने के लिए अपना समर्थन देने पर हामी भर रहे है. पहले स्विटजरलैंड, फिर अमेरिका और अब यात्रा के आखिरी पड़ाव पर मेक्सिको से भी भारत को एनएसजी में शामिल किए जाने पर मंजूरी मिल गई है.

क्या है एनएसजी? एनएसजी 48 देशों का वह अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जिसका मकसद परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने और सदस्य देशों द्वारा मिलकर परमाणु संयंत्र के माध्यम से ऊर्जा का उत्पादन कार्य पर जोर देना है. ऊर्जा उत्पादन का ये कार्य परमाणु सामग्री के आदान प्रदान से ही संभव है इसलिए केवल शांतिपूर्ण काम के लिए इसकी आपूर्ति की जाती है. गौरतलब है कि इस ग्रुप में शामिल होने से लिए पहले भारत को एनपीटी (न्यूक्लियर नॉन प्रोलिफरेशन ट्रीटी) की सदस्यता लेनी होगी. एनपीटी परमाणु हथियारों का विस्तार रोकने और परमाणु तकनीक के शांतिपूर्ण ढंग से इस्तेमाल को बढ़ावा देने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का एक हिस्सा है.

एनएसजी की सदस्यता से क्या फायदा सदस्यता मिलते ही भारत परमाणु से जुड़ी सारी तकनीक और यूरेनियम सदस्य देशों से बिना किसी समझौते के हासिल कर सकेगा. सदस्य देशों से काफी मदद मिल सकती है. एनएसजी के सभी सदस्यों के पास वीटो का अधिकार रहता है जिसका इस्तेमाल वह नए सदस्य को ग्रुप में शामिल करने के लिए कर सकते हैं. लिहाजा, एक बार सदस्य बनने के बाद भारत की अंतरराष्ट्रीय साख में वृद्धि होगी.

भारत में दुनिया का हर छठा व्यक्ति रहता है. लेकिन दुनिया के कुल उर्जा उत्पादन का महज 2 से 3 फीसदी यहां पैदा होता है. लिहाजा, भारत के लिए ऊर्जा की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए इसे एनएसजी का सदस्य बनना बेहद जरूरी है.

नरेंद्र मोदी और बराक ओबामा
देश मे मौजूदा वक्त में शहरीकरण बढ़ा है जिसके बढ़ने के बाद लोगों को ऊर्जा की खपत की जरुरतों को पूरा करने में यह राह कारगर साबित होगा. भारत के ऊर्जा संकट को खत्म करने और तरक्क़ी की तरफ जाने का यह एक सफल प्रयोग साबित होगा और अब तक भविष्य को लेकर इसकी जो समस्यायें थी, इस संगठन से जुड़कर उसपर निजात पाया जा सकता है. इसमें सफल होते ही भारत विकसित देशों में भी बहुत जल्द ही साबित हो जायेगा और दुनिया के सामने एक मिसाल कायम कर पायेगा.

स्विट्जरलैंड के इस दौरे से मोदी को बड़ा तोहफा मिला है. स्विट्जरलैड ने भारत को एनएसजी सदस्यता देने के लिए अपना समर्थन दे दिया है. गौरतलब है कि जब 1974 में यह ग्रुप बना था तब इसमे महज 7 देश थे – कनाडा, पश्चिम जर्मनी, फ्रांस, जापान, सोवियत संघ, यूनाइटेड किंगडम, और अमेरिका. बाकी देशों को धीरे-धीरे इस ग्रुप में जगह मिलती रही है.

मेक्सिको से भी मिली मंजूरी मेक्सिको ने भी भारत को एनएसजी से जोड़ने के प्रस्ताव पर मंजूरी दे दी है. प्रधानमंत्री मोदी के पांच दिवसीय विदेश यात्रा का सफल अंतिम दिन साबित हुआ. जब मेक्सिको के राष्ट्रपति ने एनएसजी का सदस्य बनने की दिशा में आगे भारत के बढ़ते हुए कदम से ये साफ दो रहा है कि अब वे दिन दूर नहीं जब भारत इसका सदस्य बनकर देशज समस्यओं से निपटने की पहल कदमी कर चुका होगा. प्रधानमंत्री मोदी का ये विदेश दौरा अपने आप में किसी बड़े बदलाव की शुरूआत से बिल्कुल भी कम नहीं है. क्योकि एनएसजी से जुड़ने के लिए भारत को इसके हर सदस्य देश की मंजूरी चाहिए.

एमटीसीआर (मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम) का सदस्य बना भारत 7 जून को अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा और भारत के प्रधानमंत्री मोदी के बीच जिन मुद्दों पर वार्ता हुई, उसमें एक एमटीसीआर का सदस्य बनने का प्रस्ताव भी था. व्हाइट हाउस में बातचीत के दौरान भारत के इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया. एमटीसीआर 35 देशों का एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसका काम दुनिया भर में मिसाइल द्वारा रासायनिक, जैविक, नाभिकीय हथियारों के प्रसार पर नियंत्रण रखना है. हालांकि इस टेक्नोलॉजी का प्रयोग कोई भी देश केवल अपनी सुरक्षा के लिए कर सकता है.

एमटीसीआर का सदस्य बनने से भारत के लिए एनएसजी की सदस्यता हासिल करने में आसानी होगी. एमटीसीआर का गठन 1997 में दुनिया के सात बड़े विकसित देशों ने किया था. बाद में 27 अन्य देश भी इसमें शामिल हुए हैं. भारत एमटीसीआर का सबसे नया और 35वां सदस्य बन चुका है.